कब एहसास बोलते हैं.... (Kab Ehsaas Bolte Hain....)

Overview

Publisher
Prowess Publishing
Released
June 22, 2026
ISBN
9781545765869
Format
ePub
Category
Poetry

Book Details

जब शब्द कम पड़ जाते हैं, तब एहसास बोलते हैं…और जब एहसास कागज़ पर उतरते हैं, तो वे सिर्फ़ पंक्तियाँ नहीं रह जाते—वे किसी की कहानी बन जाते हैं।यह पुस्तक "कब एहसास बोलते हैं" उसी अनकही, अनसुनी और अक्सर अनदेखी भावनाओं का संग्रह है, जो हमारे भीतर चुपचाप जन्म लेती हैं, पलती हैं और कभी-कभी शब्दों का रूप लेकर बाहर आ जाती हैं
इन पन्नों में प्रेम है, विरह है, इंतज़ार है, तन्हाई है, सवाल हैं, और कहीं न कहीं—खुद को तलाशने की एक गहरी कोशिश भी है
यह किताब किसी एक कहानी की नहीं, बल्कि हर उस दिल की आवाज़ है जिसने कभी बिना कहे बहुत कुछ महसूस किया है।यह उन लम्हों की गवाही है जो बीत तो गए, पर अपने निशान छोड़ गए…यह उन रिश्तों की छाया है जो साथ होकर भी अधूरे रह गए…लेखिका ने इन रचनाओं के माध्यम से यह बताने की कोशिश की है कि हर एहसास की अपनी एक ज़ुबान होती है—बस ज़रूरत है उसे सुनने की, समझने की।अगर इन शब्दों में आपको अपना कोई हिस्सा मिल जाए,तो समझिए—यह किताब अपने मकसद में सफल हो गई।— आराधना

Author Description

डॉ. आराधना श्रीवास्तव एक संवेदनशील मन की लेखिका हैं। वे एक होम्योपैथिक चिकित्सक होने के साथ-साथ एक मनोवैज्ञानिक भी हैं। उन्होंने BHMS, PGDSP तथा एम.ए. (क्लिनिकल साइकोलॉजी) में अपनी पेशेवर डिग्रियाँ प्राप्त की हैं और वर्तमान में होम्योपैथी, स्कूल काउंसलिंग तथा अपने थेरेपी कार्य के माध्यम से लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में योगदान दे रही हैं।
काम के साथ-साथ उन्हें घूमना-फिरना और जीवन के छोटे-छोटे अनुभवों को महसूस करना बेहद पसंद है। उन्हीं एहसासों को वे कविता के रूप में अभिव्यक्त करती हैं—जहाँ शब्द सिर्फ लिखे नहीं जाते, बल्कि जीए जाते हैं।
कविता उनके लिए पेशा नहीं, बल्कि शौक और आत्म-अभिव्यक्ति का माध्यम है।
उम्मीद है कि यह भावनाओं से सजी यह "किताब" आपको भी पसंद आएगी।


— डॉ. आराधना श्रीवास्तव

astharadhana@gmail.com

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