Have questions and need help?
support@ebooks2go.com

एहसास-ए-परमजोत

Overview

Publisher
Prowess Publishing
Released
December 6, 2018
ISBN
9781545743140
Format
ePub
Category
Poetry

Book Details

दास धर्म के धार्मिक ग्रंथ "यशवंती निराधार" में सहज अवतार महाराज दर्शन दास जी की इलाही वाणी "यशवंती निराधार-धाम पहला" के रूप में दर्ज की गई है और दास धर्म की दूसरी पातशाही महाराज चड़विंदा दास तीर तरक्कड़ी जी की वाणी "धाम दूजा" के रूप में संग्रहित की गई है। यशवंती निराधार-धाम पहला की तरह ही "धाम दूजा" की वाणी भी रब्बी नूर, रब्बी प्रकाश, रब्बी वरदानों और रहमतों से भरपूर है। क्योंकि गुरू साहब के कथनानुसार यह वाणी उन्हें सतगुरू महाराज दर्शन दास जी की असीम कृपा स्वरूप प्राप्त हुई है। जो उन्होंने स्वंय उनके अंतर बस कर उनके मुखारविंद से साध-संगत के, संसार के कल्याण के लिये, संसार को दिशा देने हेतु उच्चरित करवाई है।

महाराज चड़विंदा दास तीर तरक्कड़ी जी द्वारा रचित वाणी, उनकी शबद रचनायें, उनके सर्वज्ञ होने का, उनके विराट स्वरूप, उनकी पूर्णता का प्रतीक भी हैं। इसी लिये इस इलाही वाणी को भली प्रकार समझने के लिये साध-संगत ने सविनय आग्रह किया, जिसे गुरू साहब ने स्वीकार करते हुए अपनी कुछ शबद रचनाओं पर "सत्संग" के रूप में साध-संगत पर कृपा, रहमत की अमृत बरखा की है जो इस पुस्तक में प्रकाशित किये जा रहे हैं। आशा करते हैं कि समूह साध संगत जो इन सत्संगों का सामने बैठ कर श्रवण नहीं कर सकी है वह जीव, और आगे आने बाले समय में जो जीव इन पुस्तकों को पढ़ेंगे, और गुरू साहब द्वारा बताये गये मार्ग का अनुसरण करेंगे वह जीव गुरू साहब द्वारा कृपा, रहमत पा कर उस "परमजोत" का एहसास कर सकेंगे। उस अमृतव को प्राप्त कर सकेंगे। अपने जीवन को आनन्दमयी बना कर "परम पद्" की प्राप्ति कर सकेंगे।

Author Description

सतगुरू दर्शन धाम के प्रमुख, दास घर्म की दूसरी पातशाही दिव्य विभूति महाराज चड़विंदा दास तीर तरक्कड़ी जी (बलवंत सिंह) का जन्म पंजाब के जिला जालन्धर में 8 मई 1956 को हुआ। सन् 1977 में आपकी भेंट सतगुरू महाराज जी से हुई। जिनके दर्शन मात्र से आपको आत्मिक जागृति तथा दिव्य दृष्टि मिली। सतगुरू महाराज ने फरमान किया कि आपको यह जन्म भी मिशन में कर्म कमाने के लिए ही मिला है। सेवा तथा तप बन्दगी में लीन रहने के कारण सतगुरू महाराज जी ने आपको नानक की तरह अमर रहने का वरदान दिया तथा कहा कि नाम देया करेंगा, साडे वांगू रूप बदलदा रेहा करेंगा। आज से आपका नाम चड़विंदा दास है आपको प्रभ अविनासी के घर में कबूल कर लिया गया है तथा और भी कई वरदानों से नवाजा। कुछ समय पश्चात् आपके नाम के साथ "तीर तरक्कड़ी" भी जोड़ दिया। जो गुरू नानक साहब के "तोलनहारा" और गुरू गोविन्द सिंह जी के अन्याय के विरूद्ध उठाये गये 'तीर' की शक्तियों को समाहित किए हुए है। 11-11-87 को अपने जाने से पूर्व सतगुरू महाराज के हुक्मानुसार 27-9-87 को आपको तिलक किया गया व पूर्ण वरदान व हुक्म देकर गद्दी की ड्यूटी सौंपी जबकि आप 1983 से सत्संग की ड्यूटी करते आ रहे हैं तथा जीवों को निरंकार के साथ जोड़ने का दायित्व निभा रहे हैं। आपकी इलाही वाणी को प्रमुख रचना यशवंती निराधार धाम दूजा है। अन्य पुस्तकें 'इलाही इल्में कलाम कामिल मर्शिद की पहचान, दर्द से दाता तक, बारह माहा भाग-1 तथा गुरू दर्शन रहमत' है जिसके अब तक दस भाग प्रकाशित हो चुके हैं।

You can read this book in our EasyReadz App

Recently viewed Books

Help make us better

We’re always looking for ways to improve. If you’ve got feedback or suggestions about how we can do better, we’d love to hear from you.

Note: If you’re looking to solve a problem with your URMS eReader, app, or purchase, visit our Help page, or submit a help request.

What is the purpose of your visit?
Did you accomplish your goal?
Yes No
Where can we improve?
Your comments*